Friday, May 27, 2022
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Dowry Death in India दहेज हत्याओं पर आया सुप्रीम कोर्ट का ये अहम फैसला

Dowry Death in India : भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना के नेतृत्व में बनी हुई कमेटी ने हाल ही में एक निर्णय सुनाया। हम में से कोई भी नागरिक या कोई विदेशी नागरिक अपराध करता है तो उसके अपराधों पर क्या सजा होगी इसके बारे में भारतीय दंड संहिता Indian penal code में लिखा गया है।

अंग्रेजों के समय से ही चली आ रही है भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code

भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code मैकाले के समय में 1862 में लिखा गया था। जिसमें यह लिखा गया था कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी भी प्रकार का अपराध करता है तो उसे कौन सी सजा दी जाएगी। अंग्रेज तो भारत छोड़कर चले गए लेकिन उस समय की लिखी हुई भारतीय दंड संहिता indian penal code आज तक चली आ रही है। क्योंकि उस समय भी जो IPC लिखा गया था वह काफी सोच समझकर लिखा गया था।

आजादी के बाद भारत सरकार को जब जरूरत पड़ी तो 1970 में आपराधिक प्रक्रिया संहिता Criminal Procedure – CRPC लिखा। जिसमें यह लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का अपराध करता है तो उसे पकड़ने के लिए किस प्रकार की प्रक्रिया ( प्रोसीजर ) अपनाई जाएगी।

भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code में कई ऐसे अपराध थे जिनका जिक्र नहीं था।
जिस समय अंग्रेजों ने भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code लिखा था उस समय बहुत सी ऐसी घटनाएं थी जिनके बारे में इसमें जिक्र नहीं किया गया था। लेकिन आगे चलकर हमें जैसी-जैसी घटनाएं मिलती गई उसके हिसाब से नए-नए कानून बनाते चले गए। भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code और नए-नए बनाए गए कानूनों के आधार पर अपराधी को सजा दी जाती है।

6. Dowry Death in India दहेज हत्याओं पर आया सुप्रीम कोर्ट का ये अहम फैसला

दहेज लेने के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या है?

अंग्रेजों के समय पर ही दहेज को लेकर IPC की धारा 304B में लिखी गई थी। लड़कों को लगता है कि वह जब किसी लड़की से शादी करते है तो लड़की अपने यहां से बहुत कुछ लेकर आएगी। वह अपेक्षा करते हैं कि जब वह लड़के के यहां आए तो अपनी जिंदगी जीने के लिए अपने घर से ही पूरा सामान लेकर आए तभी वह लड़के के साथ रहे।

लड़के के साथ जीवन भर रहने का खर्च लड़की ही दें यही मानसिकता आगे चलकर दहेज का रूप ले लेती है। कई बार यह देखा जाता है कि जब कोई लड़का पढ़ लिख कर कामयाब हो जाता है तो वह समाज से अपेक्षा करने लगता है कि हमने जो ज्ञान प्राप्त किया है इसकी वैल्यू समाज लगाए, यही दहेज कहलाता है।

ससुराल में आत्महत्या करने पर क्यों मजबूर हो जाती है लड़कियां?

कई बार यह देखा जाता है कि जो अपेक्षा आपके दिमाग में समाज से आई है वही अपेक्षा आपको उस लड़की से भी होती है जो लड़की आपसे शादी करके आपके साथ जीवन जीने के लिए अपना घर छोड़कर आई है। जो आपके साथ जीवन जीना चाहती है वही उनकी मौत का कारण भी बन जाती है।

लड़की की ससुराल में उसके सास ससुर द्वारा बहुत प्रताड़ित किया जाता है। उस लड़की को बार-बार ये कहा जाता है कि तुम्हारे मां बाप ने तो हमें इतना रुपया दहेज, ऐसी मोटरसाइकिल या इस प्रकार की फोर व्हीलर गाड़ी देने को कहे थे। लेकिन विवाह हो जाने के बाद उन्होंने हमें कुछ नहीं दिया। लड़की को रोज-रोज ससुराल वालों से ताने सुन-सुन के परेशान हो जाती है और आत्महत्या करने पर भी मजबूर हो जाती है।

अब मानसिक अवसाद भी होगा दहेज हत्या dowry death.

हममें से जो समाज की व्याख्या करने वाले लोग हैं उन्होंने कभी मानसिक अवसाद को वैल्यू ही नहीं दी। उन्हें लगता है की अवसाद एक ही प्रकार का होता है। अवसाद का मतलब यह होता है कि कोई महिला ससुराल वालों से परेशान होकर अपनी जान तक देने का निर्णय कर ले तो यह भी एक मानसिक अवसाद है।

आज की व्याख्या बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में एनवी रमन्ना ने कहा है की अवसाद कैसा भी हो परेशानी कैसा भी हो वह मानसिक भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में मानसिक अवसाद के कारण यदि किसी महिला की मृत्यु होती है तो यह घटना भी दहेज हत्या dowry death मानी जाएगी।

भारत की संविधान में IPC की धारा 304B में दहेज ऊपर एक लाइन लिखी हुई है। जिसमें यह कहा गया है कि अगर किसी महिला की मौत जलने या ऐसे घाव से 7 साल के भीतर हुई है जिसमे में यह सिद्ध हो जाता है कि उस महिला की मौत उसके पति या उसके किसी रिश्तेदार द्वारा उसको जलाकर या प्रताड़ित करके मारा गया है तो यह दहेज हत्या dowry death मानी जाएगी

क्या है यह पूरा मामला जिस पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है?

मानसिक अवसाद की घटना 1997 बिहार में देखा गया था। जहा पर दहेज की प्रताड़ना से पीड़ित होकर एक महिला घर छोड़ कर चली गई। घर छोड़ के चले जाने के कुछ दिनों बाद उस लड़की की कंकाल एक नदी किनारे पड़ी हुई मिली थी। घरवालों की शिकायत पर कोर्ट ने लड़की के ससुराल वालों पर दहेज हत्या dowry death का केस चला दिया।

IPC की धारा 304B में यह साफ लिखा गया है कि अगर किसी महिला की मृत्यु जलाकर या उसे प्रताड़ित करके किया गया है तो इसे दहेज हत्या dowry death माना जाएगा।

लड़की के ससुराल वाले पक्ष का वकील है वह यह दलील देते हुए फिर रहा है कि सर एक बात बताइए की लड़की घर छोड़ कर चली गई। उसकी डेड बॉडी कई दिनों बाद नदी किनारे मिली ऐसी स्थिति में जो IPC की धारा 304B में यह लिखी हुई है कि उसकी मृत्यु से पहले यह सिद्ध हो जाता है कि उसके साथ अत्याचार हुआ था तो ही आप इसे दहेज हत्या dowry death कहेंगे।

बचाव पक्ष का यह कहना है कि जब लड़की ससुराल छोड़कर खुद ही चली गई थी तो यह कैसे सिद्ध हो जाता है कि लड़की के ससुराल वालों ने ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया है या दहेज के कारण ही उसकी मृत्यु हुई है। ऐसी स्थिति में आप लड़की के ससुराल वालों पर दहेज हत्या dowry death का केस नहीं लगा सकते हैं कृपा करके आप इन्हें छोड़ दीजिए।

सुप्रीम कोर्ट को यही व्याख्या करनी थी कि जो यह Soon before her death हैं। यह जो Soon शब्द है वह कितने जल्दी की बात कर रहा है। बस इसी बात को लेकर यह केस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जहा पर एनवी रमन्ना जी की बेंच ने इस बात पर व्याख्या दी कि अब तक जितने भी निर्णय हुए थे वह इस बात पर हुए थे कि मारने वाले अगर ससुराल पक्ष के हैं तो यह दहेज हत्या dowry death मानी जाती है।

कई बार दहेज लालची लोग लड़कियों को जला देते हैं, गला घोट कर मार देते हैं या पीट-पीटकर मार देते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि देश के अंदरजो दहेज प्रताड़ना के कारण लड़कियों की मृत्यु हुई है वह लगभग 7000 है। यह आंकड़े नेशनल क्राइम ब्यूरो के द्वारा दिया गया है। बड़ा सवाल यह है कि जिसे मार दिया गया उसे तो दहेज हत्या dowry death मान लिया जाता है।

लेकिन अगर कोई व्यक्ति मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है जो खुद ही जाकर आत्महत्या कर लेता है तो इसे क्या माना जाएगा। भारत के अंदर अनुच्छेद Article 21 हमें जीने का अधिकार देता है। तो ऐसी स्थिति में बचाव पक्ष का यह कहना है कि हमने तो ऐसा कुछ नहीं किया है वह तो अपने आप ही आत्महत्या कर ली तो इसमें हम लोग क्या कर सकते हैं।

कोर्ट ने यह फैसला इसी बात पर सुनाया है कि लड़की अपने आप ही आत्महत्या नहीं की है। उसे यहां तक पहुंचाने के लिए ससुराल पक्ष के लोगों ने ही उसको मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। उसने अपने Soon before her death का व्याख्या करते हुए कहा है कि शादी से लेकर 7 साल तक का समय पूरा Soon मे ही आएगा।

अगर कोई किसी लड़की को ताने मारता है जिससे वह तंग आकर आगे चलकर आत्महत्या करती है और यदि या सिद्ध हो जाता है कि यह घटना कंटिन्यूटी में बनी हुई घटना है तो यह अब दहेज हत्या dowry death मानी जायेगी।

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